कणों की अतिरिक्त गलियाँ [Verse] सुबह के छाया विसर्प में फूलों के रंग छिपे छोड़े मित्रता के बूँद अतिरिक्त [Chorus] ग्रीष्म शमेर सुबह के कण मित्रता के चित्र खिंचे हैं समय के बूँद छिपे रहें अतिरिक्त गलियाँ खोजे हैं [Outro] मौसम बदले भी रहेंगे मित्रता के रंग छिपे रहें