शमक की बाहरों [Verse] मौसम बदलते फूल खिले हैं फिर भी चारों ओर छाए छमक दोस्ती के दिल में जल रहे हैं अजब गुनाह नहीं बल्कि बरसात [Chorus] दोस्ती के सपने अजब हैं शमक की बाहरों में चमक काली रात में भी नहीं छूटे जलते हम दो जल रहे हैं चमक [Outro] दिल के बरसात में भी रहे दोस्ती के लहर बरसात के चमक चंद के रूप में रहे अजब गुनाह नहीं बल्कि बरसात के चमक